Saturday , 15 December 2018

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व्यवहार में सावधानी लाएं, मीजिल्स-रूबेला (एमआर) टीका ज़रूर लगवाएं इंजेक्शन लगने वाली जगह लालिमा, सूजन और चक्कर आना सामान्य बात बहराइच 13 दिसम्बर। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. अजीत चंद्रा ने बताया कि जनपद में पिछले 26 नवम्बर से शुरू हुए मीजिल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान अन्तर्गत 10 दिनों में 04 लाख 86 हज़ार से अधिक बच्चों का सफल टीकाकरण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में मीजिल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान के दौरान बच्चों के बीमार पड़ने की आ रही खबरों के बीच इस अभियान से जुड़े आला अफसरों का कहना है कि यह टीका बच्चों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और बहुत ही फायदेमन्द है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. चंद्रा ने बताया कि इंजेक्शन लगने के भय (इंजेक्शन फोबिया) के चलते बच्चे रोने लगते हैं और इसी डर के चलते वह अपने को बीमार या कमज़ोर महसूस करने लगते हैं। बच्चों के अन्दर से इसी भय को दूर करने के लिए स्कूलों को स्पष्ट निर्देश हैं कि टीका लगने के दौरान अभिभावक भी मौजूद रहें ताकि बच्चें घबराएं नहीं, अभियान में जुटी टीमें भी एहतियात बरतें कि यदि किसी बच्चे को गम्भीर बीमारी, बुखार आदि है तो उसे टीका इलाज उपरान्त लगाया जाए, इसके अलावा टीकाकरण के दौरान बच्चों को ऐसा माहौल दिया जाए ताकि बच्चे के अन्दर का भय अपने आप खत्म हो जाए। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. चंद्रा ने यह भी कहा कि 09 माह से 15 साल तक के बच्चों को लगने वाला मीजिल्स-रूबेला (एमआर) टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित है। कभी-कभी कुछ एक बच्चों को टीकाकरण के बाद इंजेक्शन लगने वाली जगह पर लालिमा, सूजन और हल्का चक्कर आ सकता है। यह बहुत ही सामान्य मामला है। इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि इस टीके के ज़रिये बच्चों को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है। लड़कियों के लिए तो यह कई मायने में बहुत ही खास है क्योंकि यह वर्तमान के साथ ही भविष्य में उनके माॅ बनने के दौरान रूबेला से संक्रमण के कारण गर्भपात का खतरा बना रहता है तथा गर्भवती महिला से पैदा होने वाले बच्चे में संक्रमण होने से बच्चें में सी.आर.एस. (कन्जेनाइटल रूबैला सिंड्रोम) होने का खतरा होता है। जिससे जन्म लेने वाले शिशु जन्मजात हृदय रोग, बहरापन, अंधापन, मानसिक रोग जैसे गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं। डा. चंद्रा ने बताया कि टीकाकरण अभियान शुरू करने से पहले इससे जुड़ी टीमों को बकायदा प्रशिक्षित किया गया है। टीमों को बताया गया है कि टीकाकरण के दौरान शिक्षक स्कूल में एक आचरणयुक्त वातावरण बनाएं ताकि बच्चे असहज न महसूस करें। शिक्षक खुद भी टीकाकरण स्थल पर मौजूद रहें और इस दौरान अभिभावकों की किसी भी जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास करें। इसके लिए स्कूल में टीकाकरण के लिए कम से कम तीन कमरों की व्यवस्था होनी चाहिए। एक कमरें में बच्चों को टीकाकरण के लिए कक्षानुसार बैठाएं। दूसरे कमरे में एएनएम बच्चों को टीका लगाएगी। डा. चंद्रा ने बताया कि टीका लगने के बाद बच्चा तीसरे कमरे में जायेगा जहाॅ पर वह शिक्षकों की निगरानी में आॅधे घण्टे बाकायदा आराम करेगा। उस कमरे में बच्चों के मनोरंजन के लिए खेल, कोई कार्टून फिल्म आदि की व्यवस्था हो ताकि बच्चा इंजेक्शन लगने की बात को आसानी से भुला सके। वहाॅ पर बच्चों के लिए पानी और हल्के नाश्ते की भी व्यवस्था की जा सकती है। इसके बाद भी यदि बच्चों की आॅखों में लालिमा नज़र आये या बच्चा थका हुआ या कमज़ोरी महसूस करे तो वहाॅ मौजूद सुपरवाईज़र या एनएनएम को बताएं। यह एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, जिसे कुछ ही देर में दूर किया जा सकता है। मीजिल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण या उससे होने वाली किसी भी समस्या के बारे में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी से भी सम्पर्क किया जा सकता है।